मेरे चहेते मित्र

Saturday, March 1, 2014

Terminal

बड़ा सोया , सोया सा था
खुद के सपनों में खोया सा था।

फ्यूचर का एहसास हुआ
जागने का प्रयास हुआ

ऐसा नहीं M.B.B.S. कठिन था
Engineering हमारी मेहनत से भिन्न था।

फिर भी उसको छोड़  चला
अपने सपनो कि ओर चला।

थोड़ा दौड़ा थोड़ा भागा
थोड़ा कर लिया रेस्ट।

दोस्तों वक्त हो चला था
फॉर्म भरा , दिया Entrence Test.

टेस्ट रूम कि कहानी सुनाता हूँ
जुबां से अपनी दिल-ए -हाल बताता हूँ.

अपने जोश को खुद में समावेश किया
बड़े कॉन्फिडेन्स से टेस्ट हॉल में प्रवेश किया।

अंदर जाते ही बहुत भीड़ मिला
उसमे से अपना एक वीर मिला।

मै नहीं जनता वह कौन होगा
फ्रेंड बनेगा या कॉलेज से गौण होगा।

ना जाने कितनो का इंसल्ट हुआ
पर दोस्तों हम सब का रिजल्ट हुआ।

एडमिशन लिया कॉलेज आया
सपनो का प्लेटफार्म और बढ़ाया।

सोचा कुछ ख्याति मिलेगी
सीनियर से फ्रेशेर पार्टी मिलेगी।

सपना सब टूट गया
ख्याति पीछे छूट गया।

जिसने जैसा किया वैसा भरेंगे
हम तो अपना क्लास करेंगे।

बड़े अच्छे-अच्छे  टीचर्स थे
एजुकेशन के नए फीचर्स थे।

खुद को इंट्रोड्यूस किया
प्लानिंग कि नॉलेज प्रोडूस किया।

भूलते सीखते फैलते पंख
इंटरनल में लाते अच्छे अंक

प्रोफेसरों से सीख  कर करने लगें क्लास बंक।

बंक-बंक           क्लास बंद
छोटी थी बात हुआ शशि ससपेंड।

झगड़ा झंझट और जोश था
जिसने सुलह किया वह संतोष था।

इसी तरह साल पूरा बीत गया
फ्रेशेर to सीनियर ओहदा मिला।

हमने भी वही गलती कि
फ्रेशरों कि शुरुआत हुई फिकी।

भूल कर सारे दोष अपने
बना लिए नए दोस्त नए सपने।

 रोज लड़ाई , रोज के झगड़े
हर कमेंट हर रिक्वेस्ट

एक दूजे को करे सजेस्ट
 कौन होगा यहाँ सबसे बेस्ट।
 
कुछ खट्टी सी , कुछ मीठी सी
यादों से भरी एक सीटी सी।

सीटी मार माहौल बनाये
यादों का एक शॉल  बनाये।

इस शॉल को सब ओढ़ेंगे
मर्यादा को न तोड़ेंगे।

तोड़ेंगे दीवारों को
गंदी विचारों को।

विचारों से विचार बने
खुशियों का अचार बने।

इस आचार को खाते चल
अपनी आँख लड़ाते चल
दिल कि बात बताते चल।

जो समझे वो अपने है
बाकी सारे सपने है।

सपनो को भुलाना नहीं
अपनों को रुलाना नहीं।

तो ख़ुशी छोड़ कर जायेंगे
एक इतिहास बनाएंगे।

तो एक इरादा करते है
एक दूजे से वादा करते है।

साथ सदा निभाना है
मंजिल को अपने पाना है।

इसी एहसास को जगाये रख
अपनी प्यास बढ़ाये रख।

अभी और भी है सुनाने को
अपनी बात बताने को।

पर क्षितिज के पास शब्द नहीं
विदाई का नहीं ये वक्त सही।

पर समय को किसने रोका है
जीवन का यही झरोखा है।

बस इसी के साथ विराम करू
आप सब को मै सलाम करू।



2 comments:

  1. वाह ! वाह ! वाह !

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  2. सुन्दर प्रस्तुति !
    आज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !

    ReplyDelete

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