Saturday, January 7, 2012

सन्नाटा

सन्नाटा क्या होता है 
सिर्फ मन का गूंगा पन
क्योंकि शोर तो सन्नाटे में  भी होता  है 
जिसमें आवाज नहीं आने की 
डर हमें सताती है 
और अगर कोई आवाज कानो तक 
पहुचे उसकी इन्तेजार में ही सहम जातें है
पर कोई भी लब्ज़  हमें सुनाई नहीं देती है 
तेज बारिश में ,सुनसान सड़क पर 
किसी के ना होने पर 
हमें सन्नाटा सा लगता है 
और भरी महफ़िल में 
किसी पहचान के बिना  हम  
सन्नाटा महसूस करते है 
सर्द हवाओं में भी हम 
सूरज के छुपने पर 
सन्नाटा सा पातें है 
और कड़ी  धुप में 
जलता बदन सन्नाटा महसूस करता है 
मै कवी हूँ और अर्थ से परे लिखना मेरी आदत है 
इसलिए सन्नाटे को शोर का 
रिश्तेदार जनता हूँ 
जो की शोर से कहीं ज्यादा 
प्रभावशाली है 
शोर तो सिर्फ बहार से विचलित करता है 
पर ये सन्नाटा उंदर अन्तः मन को भी झकझोर देता है 
और मै इसी सन्नाटे को 
अपना दोस्त बना चूका हूँ 
जो की मेरे अन्तः मन को रोज  झकझोरता है 
और रोज मै डरा डरा सा खुद को पता हूँ 



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