क्षितिज

स्वयं से युद्घ करूँ मैं क्षितिज हूँ जित हो या हार दोनों से है मुझको प्यार

Sunday, March 18, 2018

आधा जीवन

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बचपन से लेकर आज तक, मेरा जीवन,         आधा है। जब भी पूर्ण   करना चाहा, मिले मुझको कई बाधा है। जो प्राण मिला वो आधा था, ना जान...
Sunday, April 19, 2015

खोद लूँ कब्र या गुलिस्तां उगाऊँ

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दो टुकड़े इज़्ज़त के कैसे लाऊँ तिनका कहाँ से ढूँढू  कैसे आशियाना बनाऊं  इस खूंखार जंगल में  दो पल चैन कहाँ पाऊँ  समुद्र के बीच हूँ  फ...
Monday, February 23, 2015

खुद को झंझोड़ता

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हर रोज दौड़ता खुद को झंझोड़ता बेड़ियों से बांध कर बेड़ियों को तोड़ता खुशियों की चाह में ग़मों को छोरता गम जो मिल जाए तो ख़ुशी का दिल तोड़...
Wednesday, February 4, 2015

हे कृष्ण जरा तू बतलाना

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हे कृष्ण जरा तू बतलाना क्यों सीखा माखन चुराना क्या स्वाद का आकर्षण था या माखन में तेरा जीवन था गर तू माखन चोर था फिर क्यों इसका श...
1 comment:
Tuesday, December 30, 2014

हसु या रोऊँ

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तेरे मांग में लगा सिंदूर देखा तेरे हाथों में तेरा खून देखा खुश हूँ आज मैं जो तू खुश है अब तो तेरे पास सबकुछ है मैंने कबका तुझे विस...
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मै कौन

Unknown
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