Friday, February 25, 2011

दिल की चाहत

कुछ बंदिशे तोरने को दिल चाहता है 
कुछ गलतियाँ करने को दिल चाहता है 
हम चल ना सके जिन राहों में
उन रास्तों पर चलने को दिल चाहता है
करता तो हूँ मै हमेशा ही अच्छे काम 
पर आज कुछ गलत करने को दिल चाहता है 
बोलता हूँ हमेशा ही अच्छे बोल 
पर आज गलत बोलने को दिल चाहता है 
क्यूँ बोझ ढोता रहू मै समाज की 
आज समाज से लड़ने को दिल चाहता है 
ना ही मागुंगा इजाजत ना ही लूँगा किसी की मदद 
बस यूँ ही गिरते पड़ते दौड़ने को दिल चाहता है 
मेरी जिन्दगी खुले आसमां के नीचे खरी 
आज पंख लगा उड़ने को दिल चाहता है 
तू देख मेरे हसरतों के खज़ाने को 
आज खज़ाना भरने को द्दिल चाहता है 
ख़्वाब जो भी देखे है मैंने 
सारे ख़्वाब पुरे करने को दिल चाहता है

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